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केंद्रीय मंत्रिमंडल के अहम फैसले

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 06 फरवरी को कई अहम फैसले लिए.

1. केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अनियमित जमा योजनाओं पर प्रतिबंध लगाने संबंधी विधेयक 2018 में आधिकारिक संशोधन करने के प्रस्‍ताव को मंजूरी दी. इस प्रस्ताव के तहत यह विधेयक जमा राशि जुटाने वालों को किसी भी अनियमित जमा योजना का प्रचार-प्रसार करने, संचालन करने, विज्ञापन जारी करने अथवा जमा राशि जुटाने से प्रतिबंधित करता है.

2. दूसरे अहम फैसले में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सिनेमैटोग्राफ अधिनियम में संशोधन करने के लिए सिनेमैटोग्राफ संशोधन विधेयक, 2019 को पेश करने के लिए सूचना और प्रसारण मंत्रालय के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. इस विधेयक का उद्देश्य अनधिकृत कैमकोडिंग और फिल्मों के दोहराव के दंडात्मक प्रावधानों को शामिल करके फिल्म्स पायरेसी से निपटना है.

3. सीसीईए ने प्रसार भारती की ''प्रसारण बुनियादी ढांचा और नेटवर्क विकास'' योजना को मंजूरी दी. 2020 तक तीन वर्ष की अवधि के लिए 1054.52 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है. इसमें पूर्वोत्‍तर के लिए दूरदर्शन का अरुण प्रभा चैनल शुरू किया जाएगा. 206 स्‍थानों पर एफएम रेडियो का विस्‍तार होगा और भारत-नेपाल सीमा और जम्‍मू-कश्‍मीर सीमा पर छह 10 किलोवाट क्षमता के एफएम ट्रांसमीटर स्‍थापित किए जाएंगे.

4. मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने ग्रामीण कृषि बाज़ारों के उन्नयन एवं विकास के लिये कृषि-बाज़ार अवसंरचना के निर्माण को अनुमति प्रदान की साथ ही 12,000 मेगावॉट की ग्रिड कनेक्टिड सौर फोटोवॉल्टिक विद्युत परियोजनाओं की स्थापना को भी मंजूरी दी गई.

5. केंद्रीय मंत्रिमंडल ने गायों के संरक्षण और विकास और उनकी संतानों के संरक्षण के लिए राष्ट्रीय कामधेनु आयोग की स्थापना को मंजूरी दी वहीं जलपाईगुड़ी में कलकत्ता उच्च न्यायालय की सर्किट बेंच की स्थापना को मंत्रिमंडल ने मंजूरी दी गई.

6. कैबिनेट ने संसद में राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी, एंटरप्रेन्योरशिप और प्रबंधन विधेयक, 2019 की शुरूआत को भी मंजूरी दे दी.

आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्ग के आरक्षण बिल को राष्ट्रपति की मंज़ूरी

सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए शिक्षा और नौकरियों में 10% आरक्षण वाले बिल को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने मंजूरी दे दी है. इससे पहले संसद के दोनों सदनों से इस बिल को पारित किया जा चुका है. सामान्य वर्ग के लिए आरक्षण का यह प्रावधान अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़े वर्गों को मिलने वाले 50 फीसदी आरक्षण से अलग है.

नागरिकता (संशोधन) विधेयक 2019

लोकसभा में नागरिकता (संशोधन) विधेयक, 2019 पारित किया गया, इस बिल के द्वारा नागरिकता अधिनियम, 1955 में संशोधन किया जायेगा।इस बिल के द्वारा बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान के प्रताड़ित हिन्दू, जैन, सिख, इसाई, बौद्ध तथा पारसी नागरिकों को भारत की नागरिकता प्रदान की जाएगी। रिपोर्ट के अनुसार प्रताड़ित धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिए सरकार 31 दिसम्बर, 2014 को कट ऑफ डेट निश्चित कर सकती है। परन्तु कांग्रेस एवं तृणमूल कांग्रेस के सदस्यों द्वारा इस बिल का विरोध किया गया है.

आर्थिक रुप से पिछड़ों के लिए आरक्षण विधेयक राज्यसभा में पास

सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों को 10 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए लाया गया संविधान संशोधन (124वां संशोधन) विधेयक राज्यसभा से 9 दिसंबर को पास हो गया । यह विधेयक लोकसभा में 8 जनवरी को ही पारित हो चुका है। संविधान 124 वां संशोधन 2019 विधेयक को 7 के मुकाबले 165 मतों से मंजूरी दे दी। इससे पहले सदन ने विपक्ष द्वारा लाए गए संशोधनों को मत विभाजन के बाद नामंजूर कर दिया। सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री थावरचंद गहलोत ने विपक्षी सदस्यों के हंगामे के बीच 124वां संविधान संशोधन विधेयक 2019 सदन में रखा।10 फीसदी का ये आरक्षण मौजूदा 49.5 प्रतिशत आरक्षण से अलग होगा। आरक्षण आर्थिक रूप से पिछड़े ऐसे गरीब लोगों को दिया जाएगा जिन्हें अभी मौजूदा आरक्षण व्यवस्था के तहत फायदा नहीं मिल रहा है। फैसले को लागू करने के लिए संविधान के अनुच्छेद 15 और 16 में नए उपबंध जो़ड़े जा रहे हैं ।

आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्ग को आरक्षण देने संबंधी बिल लोकसभा से पारित

देश में आर्थिक तौर पर कमजोर लोगों को शिक्षा एवं सरकारी नौकरियों में 10 फीसदी आरक्षण सुनिश्चित करने वाला 124वां संविधान संशोधन विधेयक मंगलवार को लोकसभा में पारित हो गया. विधेयक पर हुए मतदान के दौरान पक्ष में 323 वोट पड़े, वहीं विपक्ष में 3 वोट पड़े. सरकार की ओर से केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री थावरचंद गहलोत ने इसे सदन में पेश किया. उन्होंने कहा कि गरीबों के लिए ये आरक्षण पहले के आरक्षण को बिना छेड़े दिया जा रहा है और इसमें हर धर्म के लोग शामिल होंगे.लोकसभा के बाद अब इस विधेयक को राज्यसभा से पारित कराना होगा और उसके बाद राष्ट्रपति की मंजूरी लेनी होगी, जिसके बाद ये कानून बन जाएगा.

आर्थिक रूप से पिछड़ों को 10 प्रतिशत आरक्षण

केंद्र सरकार ने सोमवार को एक बड़ा फ़ैसला लेते हुए आर्थिक रूप से पिछड़ों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण देने को मंज़ूरी दे दी. इसके तहत अब तक अनारक्षित श्रेणी में आने वाले लोग इस फ़ैसले का लाभ ले सकेंगे. इस श्रेणी के आरक्षण के प्रभाव में आने से आरक्षण की सीमा को बढ़ाने की ज़रूरत पड़ेगी, जिसके लिए संविधान संशोधन की आवश्यकता होगी. अनारक्षित वर्ग में ऐसे बहुत से लोग हैं, जो आर्थिक तौर पर कमज़ोर हैं और इनके आर्थिक उत्थान के लिए सरकार ने ये फैसला लिया है.

तीन तलाक बिल लोक सभा से पास

लोकसभा में कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण विधेयक 2018 पेश किया. सदन में वोटिंग के बाद विधेयक के पक्ष में 245 और विरोध में 11 वोट पड़े. लोकसभा से तीन तलाक बिल पारित हो गया है.अब इसे राज्यसभा में मंजूरी के लिए पेश किया जाएगा। इसके बाद ही यह कानून की शक्ल ले सकेगा। सदन में मौजूद 256 सांसदों में से 245 सदस्यों ने इसके पक्ष में मतदान किया, जबकि 11 सदस्यों ने इसका खिलाफ अपना वोट दिया। इससे पहले दिसबंर 2017 में भी लोकसभा से इसे मंजूरी मिली थी, लेकिन राज्यसभा पारित नहीं हो सका था. इससे पहले दिसबंर 2017 में भी लोकसभा से इसे मंजूरी मिली थी, लेकिन राज्यसभा पारित नहीं हो सका था.साथ ही सदन में असदुद्दीन ओवैसी के तीन संशोधन प्रस्ताव भी गिर गए। कई अन्य संशोधन प्रस्तावों को भी मंजूरी नहीं मिली।


केंद्रीय मंत्रिमण्डल ने मुस्लिमों से संबंधित किस नियम एवं परम्परा को अपराध घोषित करते हुए एक अध्यादेश लाने के लिए सितंबर 2018 में एक प्रस्ताव पारित किया है.?

केंद्रीय मंत्रिमण्डल के इस प्रस्ताव पर राष्ट्रपति ने 19 सितंबर, 2018 को अध्यादेश जारी कर दिया है. इसके अनुसार सुप्रीम कोर्ट में गैर-क़ानूनी घोषित किये जा चुके तीन तलाक (तलाक-ए-बिददत) को दंडनीय अपराध माना है. एक साथ तीन तलाक देने पर पुरुष को तीन वर्ष की सजा हो सकती है.

भारत के उच्चतम न्यायलय ने सितंबर 2018 में दिए गए एक निर्णय में आईपीसी (IPC) किस धारा के अंतर्गत समलैंगिकता को अपराध न मानते हुए इस प्रावधान को निष्प्रभावी किया है?

मुख्य न्यायधीश न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा की अध्य्क्षता वाली पांच सदस्यी संविधान पीठ ने एलजीबीटीक्यू (LGBTQ) समुदाय द्वारा याचिकाओं पर निर्णय देते हुए भारतीय दण्ड (IPC) की धारा 377 के उस प्रावधान को जिसमे समलैंगिक संबंधों को अपराध माना गया है,निष्प्रभावी कर दिया. अतः सहमति से बने समलैंगिक संबंध अब अपराध नहीं है.

राष्ट्रीय डिजिटल संचार नीति-2018

दूरसंचार विभाग (DOT) ने नई दूरसंचार नीति का मसौदा, ‘राष्ट्रीय डिजिटल संचार नीति-2018’ के नाम से जारी किया है। ध्यातव्य है कि इसके तहत, वर्ष 2022 तक 40 लाख नए रोजगार सृजन करने के महत्त्वपूर्ण लक्ष्य के साथ ही अन्य कई सुविधाओं का प्रावधान किया गया है।
♦2020 तक सभी ग्राम पंचायतों को 1 gbps ब्रॉडबैंड की सुविधा प्रदान कराना ।
♦ 2022 तक 10 gbps ब्रॉडबैंड की सुविधा प्रदान कराना।
♦ टेलिकॉम सेक्टर में 100 अरब डॉलर के निवेश को आकर्षित करना।
♦ 50 mbps स्पीड ब्रॉडबैंड सेवा उपलब्ध करवाना।
♦ 40 लाख नए लोगों को रोजगार उपलब्ध करवाना।
♦ 2020 तक यूनिक मोबाइल सब्सक्राइबर घनत्व (unique mobile subscriber density) को 55 तथा 2022 तक 65 तक बढ़ाना।
♦नई पॉलिसी के ड्राफ्ट के तहत, 'राष्ट्रीय ब्रॉडबैंड अभियान’(National Broadband Mission) की स्थापना की बात कही गई है, जो USOF और पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के वित्त पोषण माध्यम से सार्वभौमिक ब्रॉडबैंड की पहुँच सुनिश्चित करेगा।
♦इसके साथ ही नई नीति के तहत, भारत में सैटेलाइट कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी (SCT) को मज़बूत करने के बारे में भी उल्लेख किया गया है।
♦50 प्रतिशत घरों तक लैंडलाइन ब्रॉडबैंड की पहुँच सुनिश्चित करना तथा लैंडलाइन पोर्टेबिलिटी सेवाएँ प्रारंभ करना।

समलैंगिक संबंध अपराध नहीं

देश की सर्वोच्च अदालत ने गुरुवार को समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से हटा दिया है. इसके अनुसार आपसी सहमति से दो वयस्कों के बीच बनाए गए समलैंगिक संबंधों को अब अपराध नहीं माना जाएगा. सुप्रीम कोर्ट के चीफ़ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस रोहिंटन नरीमन, एएम खानविल्कर, डी वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस इंदु मल्होत्रा की संवैधानिक पीठ ने इस मसले पर सुनवाई की. संविधान पीठ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि LGBT समुदाय को भी अन्‍य नागरिकों की तरह जीने का हक है. पीठ ने अपने आदेश में कहा, हमें पुरानी धारणाओं को बदलने की जरूरत है. नैतिकता की आड़ में किसी के अधिकारों का हनन नहीं किया जा सकता. यह निर्णय अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) की व्याख्या पर आधारित है, अनुच्छेद 15 (धर्म, जाति, जाति, लिंग या जन्म स्थान के आधार पर भेदभाव की निषेध), अनुच्छेद 19 (भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता) और अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार और गोपनीयता का अधिकार) के तहत दिया गया हैं. धारा 377 को पहली बार कोर्ट में 1994 में चुनौती दी गई थी. 24 साल और कई अपीलों के बाद सुप्रीम कोर्ट के पांच न्यायाधीशों की खंडपीठ ने अंतिम फ़ैसला दिया है. चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा कि जो भी जैसा है उसे उसी रूप में स्वीकार किया जाना चाहिए. फ़ैसले का स्वागत करते हुए आईआईटी मुंबई के याचिकाकर्ता कृष्णा ने कहा, "आईआईटी में दाखिला मिलने पर भी इतनी खुशी नहीं हुई थी, जितनी आज हो रही है. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने साल 2013 में दिल्ली हाई कोर्ट के फ़ैसले को पलटते हुए इसे अपराध की श्रेणी में डाल दिया था. भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) में समलैंगिकता को अपराध माना गया था. आईपीसी की धारा 377 के मुताबिक, जो कोई भी किसी पुरुष, महिला या पशु के साथ अप्राकृतिक संबंध बनाता है तो इस अपराध के लिए उसे 10 वर्ष की सज़ा या आजीवन कारावास का प्रावधान रखा गया था. इसमें जुर्माने का भी प्रावधान था और इसे ग़ैर ज़मानती अपराध की श्रेणी में रखा गया था.

राष्ट्रीय खेल विश्वविद्यालय विधेयक 2018 पारित

लोकसभा ने 3 अगस्त 2018 को राष्‍ट्रीय खेल विश्‍वविद्यालय विधेयक 2018 पारित कर दिया है. राष्ट्रीय खेल विश्वविद्यालय विधेयक पर सदन में चर्चा के बाद ध्वनिमत से पारित किया गया.इस विधेयक में खेलों को बढ़ावा देने के उद्देश्‍य से अपनी तरह का पहला राष्‍ट्रीय खेल विश्‍वविद्यालय मणिपुर में खोले जाने का प्रस्‍ताव है.राष्‍ट्रीय खेल विश्‍वविद्यालय का मुख्यालय मणिपुर में होगा.




बांध सुरक्षा विधेयक-2018 को मंजूरी

यह विधेयक राज्‍यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों को एकरूप बांध सुरक्षा प्रक्रियाओं को अपनाने में मदद देगा, जिससे बांधों की सुरक्षा सुनिश्‍चित होगी और इन बांधों से होने वाले लाभ सुरक्षित रहेंगे.

पोक्सो एक्ट में बदलाव

केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने 21 अप्रैल 2018 को एक बड़े फैसले के तहत पोक्सो एक्ट में बदलाव के लिए अध्यादेश को मंजूरी दे दी. इस बैठक में 'प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंस' यानी पॉक्सो एक्ट में संशोधन को हरी झंडी दी गई. इस संशोधन के तहत देश में 12 साल या उससे कम उम्र की बच्चियों के साथ रेप के दोषियों को फांसी की सजा दी जा सकेगी. पॉक्सो कानून के वर्तमान प्रावधानों के अनुसार इस जघन्य अपराध के लिए अधिकतम सजा उम्रकैद है, न्यूनतम सजा सात साल की जेल है. इसमें बलात्कार के बाद महिला की मृत्यु हो जाने या उसके मृतप्राय होने के मामले में एक अध्यादेश के माध्यम से मौत की सजा का प्रावधान शामिल किया गया जो बाद में आपराधिक कानून संशोधन अधिनियम बन गया.



निजता का अधिकार मौलिक अधिकार घोषित

24 अगस्त, 2017 को उच्चतम न्यायालय ने देश के प्रत्येक नागरिक को प्रभावित करने वाले अपने ऐतिहासिक फैसले में निजता के अधिकार (Right to Privacy) को भारतीय संविधान के तहत मौलिक अधिकार घोषित किया। मुख्य न्यायाधीश जे.एस. खेहर की अध्यक्षता वाली 9 सदस्यीय संविधान पीठ ने सर्वसम्मत से अपने निर्णय, में कहा कि ‘‘निजता का अधिकार’’ भारतीय संविधान के भाग तीन का स्वाभाविक अंग है जो कि अनुच्छेद 21(जीवन के अधिकार और व्यक्तिगत स्वतंत्रता) के तहत आता है। यह निर्णय विभिन्न जन-कल्याण कार्यक्रमों का लाभ उठाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा आधार कार्ड को अनिवार्य करने को चुनौती देने वाली याचिकाओं से जुड़ा हुआ है।

सशस्त्र बल विशेषाधिकार कानून (अफस्पा)

सशस्त्र बल विशेषाधिकार कानून (अफ्सपा) 1958 में संसद द्वारा पारित किया गया था और तब से यह कानून के रूप में काम कर रही है. आरंभ में मणिपुर, मेघालय, मिज़ोरम, त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश, असम में भी इसे लागू किया गया था लेकिन मणिपुर सरकार ने वर्ष 2004 में राज्य के कई हिस्सों से इसे हटा दिया गया. जम्मू-कश्मीर में सशस्त्र बल विशेषाधिकार कानून (अफ्सपा) 1990 में लागू किया गया था. इस कानून के तहत सेना को किसी भी व्यक्ति को बिना कोई वारंट के तलाशी या गिरफ्तार करने का विशेषाधिकार है. सशस्त्र बल विशेषाधिकार कानून (अफ्सपा) के तहत सेना के जवानों को कानून तोड़ने वाले व्यक्ति पर फायरिंग का भी पूरा अधिकार प्राप्त है.




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